नमस्कार दोस्तों हमारे भारतीय🇮🇳👳 संस्कृति ब्लाग में आप सभी का स्वागत है
माँ की बातें🙏🙏 आज शनिवार है. शनिवार के दिन जब बिना स्नान किए सुबह कुछ खाने को जिद करती थी तो माँ बहुत ही मनुहार के साथ मनाती पहले नहा धोकर हनुमान चालीसा पढ़ लो तभी खाना मिलेगा |अब तो शनिवार के दिन बिना पूजा किए पानी💧 भी नहीं पी पाती हूँ | पूजा करते वक्त आखें बरबस ही छलक आतीं है | माँ के दिए हुए संस्कार आज भी जीवन के अंधेरी सुरंग में मशाल🔦 की भांति कर्मपथ आलोकित करते हुए साहस प्रदान करता है | लगता ही नहीं है कि आप अब नहीं हैं जीवन के हर सांस में आपको पाती हूँ | क्या ऐसा संभव है कि एक इकाई अनेक में विभक्त होकर भी हर जगह पूर्णता के साथ उपस्थित हो 🌟🌟🌟आप वैसे ही अपनी⛔ दिव्यता के साथ हम सभी के साथ हैं माँ |
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