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भारतीय🇮🇳👳 संस्कृति में कोरोना से बचाव के उपाय

प्रिय दोस्तों👭👬👫 आज फिर से मुझे कोरोना जैसे महामारी पर कुछ लिखने का मन कर रहा है क्योंकि अभी भी इसका खतरा टला नहीं है  .  कोरोना से बचाव में भारतीय संस्कृति की अहम भूमिका रही है.  जैसा कि हम सभी को मालूम है और ये सारी बातें हमलोग को कहीं न कही बचपन से पता भी है  . ये अलग बात है कि हम सब अपने परंपरा गत आदतों को छोड़ते जा रहे थे   आज वही सब  आदतों को फिर से अपने जीवन में शामिल करने की आवश्यकता आन पड़ी है  .  अभिवादन करने का तरीका   अब तो ये सिद्ध हो गया कि अभिवादन करने की भारतीय परंपरा ही सर्वश्रेष्ठ है. दोनों हाथों को जोडकर नमस्ते👋 करने की परंपरा का कोई जवाब नहीं.  भारतीय संस्कृति में हर कोई को चूमने और   हर व्यक्ति को  गले लगाने की प्रथा नहीं रही है खासकर बडे़ हो जाने के बाद  . नमस्ते वाला अभिवादन अब विश्वव्यापी 🌍 हो चला है  . कोरोना से बचाव के लिए शारीरिक दूरी है बहुत जरूरी  .   स्वच्छता वाली आदत -    रखे सही सलामत           भारतीय परंपरा में ...

पचास साल के बाद की दिनचर्या

प्रिय दोस्तों👭👬👫 आज मैं  उन लोगो के बारे में कुछ बातें लिखना चाहती हूँ जो लोग अपने जीवन में पचास बसंत देख चुके हैं  . सबसे पहले तो आपलोग खुश 😄😃 हो जाइये कि आपने अर्धशतक पुरा कर लिया  . भारतीय संस्कृति में शतायु पुरा करने की स्थिति को आदर्श जीवन काल माना गया है  जो कि अब कम लोग ही  पुरा कर पाते हैं  . पचास साल पुरा कर लेने के बाद व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं   अब ये बात समझ लेना चाहिए कि जीवन का अधिकांश समय भागदौड़ में बीत गया  और अब ठहरकर अपने बारे में सोचने की आवश्यकता है. अपने स्वास्थ्य के लिए सोचना चाहिए 1. जहाँ तक संभव हो सके  जल्दी सोने और  सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ देना चाहिए 2.  योग एवं व्यायाम को अपने दैनिक जीवन में अनिवार्य रूप से शामिल कर लेना चाहिए 3. अपने किसी एक हाॅवी को विकसित कर लेना चाहिए .  4 . हो सके तो अपने आस पास के किसी बाग बगीचे मे थोड़ा समय व्यतीत करने की आदत डाल लेना चाहिए ताकि आप प्रकृति🌿🍃 के सानिध्य में कुछ समय बिता सके.  5. वैसे ...

भारतीय संस्कृति में दस प्रकार के सुख की बात कही गई है जिसके अनुसार - प्रथम सुख सुन्दर हो काया दूजा सुख घर में हो माया..... और भी आगे है जिसकी चर्चा आगे के भाग में होगी | सर्व प्रथम यहाँ व्यक्ति के सुन्दर काया यानि कि स्वस्थ एवं निरोगी शरीर के बारे में कहा गया है. जो व्यक्ति स्वस्थ शरीर का मालिक है वही व्यक्ति दूनिया मे सबसे सुखी प्राणी है | अगर आप स्वस्थ हैं तभी आप संसार के अन्य सुखों के उपभोग करने लायक रहेंगे | जीवन के आपाधापी में व्यक्ति अपने शरीर के प्रति लापरवाही बरतता है इसके कारण दिनोंदिन व्यक्ति का शरीर अस्वस्थ होता जाता है | फिर एक दिन ऐसा आता है कि लाख उपाय करने के बावजूद व्यक्ति अपने पूर्ववत् अवस्था में नहीं पहुंच पाता है | एक कहावत भी है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है |कहने का तात्पर्य है कि हम सभी की ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि अपने आप को स्वस्थ रखने के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाय |

स्वस्थ  जीवन जीने के लिए  निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अति आवश्यक है | 1. खान- पान  हमारे दैनिक जीवन के भोजन पर हमारा स्वास्थ्य निर्भर करता है  |  रोजमर्रा के  जीवन में हमे सात्विक आहार ही लेना चाहिए |  शाकाहारी भोजन मानव के लिए सर्वोत्तम भोजन  है |  शाकाहारी  भोजन   हमें कई बीमारी से दुर रखता है 2.  मौसम के अनुसार भोजन -व्यक्ति को मौसम के अनुसार ही भोजन करना चाहिए| क्या आपको पता है  कि भोजन के तौर तरीके से न सिर्फ हमारा   शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी निर्धारित होता है  | पौष्टिक भोजन व्यक्ति के विकास की पहली एवं  अनिवार्य शर्त है |ऐसे भी कहा गया है कि पेट की आग सबसे भंयकर आग 🔥 होती है जब जठराग्नि प्रज्ज्वलित   होती है तो इंसान नैतिक अनैतिक का भेद भूल जाता है| 3  . आयु के  अनुसार भोजन  -  हर आयु वर्ग के लिए अलग अलग प्रकार के भोजन का वर्णन भारतीय संस्कृति में  है जो आज भी  प्रासंगिक है | बच्चे को वैसे भोजन देना आवश्यक एवं उचित होगा जो उनके शा...