भारतीय संस्कृति में दस प्रकार के सुख की बात कही गई है जिसके अनुसार - प्रथम सुख सुन्दर हो काया दूजा सुख घर में हो माया..... और भी आगे है जिसकी चर्चा आगे के भाग में होगी | सर्व प्रथम यहाँ व्यक्ति के सुन्दर काया यानि कि स्वस्थ एवं निरोगी शरीर के बारे में कहा गया है. जो व्यक्ति स्वस्थ शरीर का मालिक है वही व्यक्ति दूनिया मे सबसे सुखी प्राणी है | अगर आप स्वस्थ हैं तभी आप संसार के अन्य सुखों के उपभोग करने लायक रहेंगे | जीवन के आपाधापी में व्यक्ति अपने शरीर के प्रति लापरवाही बरतता है इसके कारण दिनोंदिन व्यक्ति का शरीर अस्वस्थ होता जाता है | फिर एक दिन ऐसा आता है कि लाख उपाय करने के बावजूद व्यक्ति अपने पूर्ववत् अवस्था में नहीं पहुंच पाता है | एक कहावत भी है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है |कहने का तात्पर्य है कि हम सभी की ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि अपने आप को स्वस्थ रखने के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाय |
स्वस्थ जीवन जीने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अति आवश्यक है |
1. खान- पान हमारे दैनिक जीवन के भोजन पर हमारा स्वास्थ्य निर्भर करता है | रोजमर्रा के जीवन में हमे सात्विक आहार ही लेना चाहिए | शाकाहारी भोजन मानव के लिए सर्वोत्तम भोजन है | शाकाहारी भोजन हमें कई बीमारी से दुर रखता है
2. मौसम के अनुसार भोजन -व्यक्ति को मौसम के अनुसार ही भोजन करना चाहिए|
क्या आपको पता है कि भोजन के तौर तरीके से न सिर्फ हमारा शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी निर्धारित होता है | पौष्टिक भोजन व्यक्ति के विकास की पहली एवं अनिवार्य शर्त है |ऐसे भी कहा गया है कि पेट की आग सबसे भंयकर आग 🔥 होती है जब जठराग्नि प्रज्ज्वलित होती है तो इंसान नैतिक अनैतिक का भेद भूल जाता है|
3 . आयु के अनुसार भोजन - हर आयु वर्ग के लिए अलग अलग प्रकार के भोजन का वर्णन भारतीय संस्कृति में है जो आज भी प्रासंगिक है |
बच्चे को वैसे भोजन देना आवश्यक एवं उचित होगा जो उनके शारीरिक तथा मानसिक विकास के अनूकुल हो |
व्यस्कों के लिए ऊर्जा से भरपूर भोजन चाहिए जिससे कि उनके दिनचर्या में जोश की कमी न हो |
बुजुर्गों के लिए सुपाच्य एवं सादा भोजन ही होना चाहिए चाहिए क्योंकि बढती उम्र के साथ पाचन क्रिया में शिथिलता आती है|
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