माँ के आदर्श 🙏🙏 " सादा जीवन उच्च विचार " माँ ने इस सूत्र वाक्य को अपने जीवन में आत्मसात कर लिया था एवं हमलोग को भी इसी तरह से जीवन व्यतीत करने की शिक्षा देते रहतीं थीं | काफी धन संपत्ति की स्वामिनी होने के बावजूद भी बहुत ही साधारण तरीके से जीवन यापन करतीं थीं| | दिखावा बिल्कुल ही नहीं पसंद था आप को न ही आडंबर में विश्वास था आप का |जितना संभव हो सकता था जरूरमंद व्यक्ति के सहायता के लिए तत्पर रहतीं थीं आप | हमेशा आप कहतीं थीं कि दायाँ हाथ द्वारा दिया गया दान बाएँ हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए | वात्सल्य भाव ऐसा कि आप के नजर में हरेक बच्चा आप को अपने संतान जितना ही प्यारा लगता था | हमलोग कभी कभी आप के इस व्यवहार पर चिढ़ जाते थे तब आप बडे़ प्यार से समझाती थीं कि बालरूप में भगवान बसते हैं इसलिए बच्चों में भेद भाव उचित नहीं है | इतना विराट भाव की स्वामिनी थीं आप माँ... 🙏🙏🙏

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माँ की सीख🙏🙏 माँ हमेशा सिखाया करतीं थीं. जीवन में कभी भी बेकार मत बैठे रहना क्योंकि बैठे बैठे व्यक्ति👤 सोने की दीवार खा जाता है🤗 मतलब धनी व्यक्ति भी अगर कोई उद्यम नहीं करता है और विरासत में मिली संपत्ति का उपभोग करते रहता है तो वह कंगाल हो जाता है | वहअपने बच्चों👧👦 के लिए कुछ भी नहीं छोड़कर जाएगा | इसलिए विरासत में मिली संपत्ति को अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने तथा परिवार👨👦👧👩👴👵 के लिए रोटी स्वयं उपार्जन करना चाहिए | कितने अमूल्य विचारों को आपने सहज ही समझा दिया माँ..🙏🙏🙏