फलसफा जिंदगी का

किसी के लिए जिंदगी के मायने क्या हो सकता है यह व्यक्ति🚶 के सोच पर निर्भर करता है  | एक समय रहता है जब  माँ -बाप के लिए  बच्चे पुरी दुनिया होने का अहसास कराते हैं  वहीं बच्चों की पुरी दुनिया भी माँ बाप तक सीमित रहती है | फिर बच्चे👶👶 बडे़ होते हैं  उनका संसार व्यापक होता जाता है  |समय के साथ प्राथमिकता बदलती जाती है |बच्चों के भी अपने 👶👶बच्चें होते हैं |इधर माँ बाप की दुनिया, पुरी तरह से बच्चे और उसके बच्चों तक सिमट सी जाती है | फिर एक समय ऐसा आता है जब जिनकी दुनिया हम होते हैं और जो हमारे लिए पुरी दुनिया बनाते हैं वही हमें छोड़ कर चले जाते हैं अथवा उन्हें जाना पड़ता है  

समझ में नहीं आता है कि जिदंगी के मायने क्या ❓ हैं  कहाँ से हमलोग आए हैं और कहाँ जाना है अजीब सी अबूझ पहेली में दिमाग उलझा रहता है  | माँ -बाबुजी का परलोक गमन जीवन का वह "पाठ" पढा गया जिसकी कल्पना मात्र से ही कभी सिहर जाते थे | अब तो इस मायावी दुनिया से ज्यादा इसकी नश्वरता में विश्वास हो चला है | अब नतो कोई बात कडवी लगती है और न ही किसी की बातें आकर्षित करती है | एक ही बात मन को तसल्ली देता है कि हमें भी एक दिन इस संसार को छोड़कर जाना है |परंतु दूसरे ही क्षण बच्चों का ख्याल आता है और फिर से मन चिंताओं से घिर जाता है हालांकि जिनके बच्चे अपने जीविकोपार्जन लायक हो गए हैं उनके लिए चिंता की बात नहीं है फिर भी मन कहाँ मानता है | 


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