माँ की चिठ्ठी 🙏🙏 आज ही तो मिली जिसमें लिखा था " छोटु अब मुस्कुराने लगा होगा क्योंक आज पुरे तीन महीने का हो गया बिल्कुल सही बात थी पता नहीं कैसे उतने दुर से भी माँ को सब पता होता था बच्चों के मन की बात जान जातीं थी बिना कहे | माँ तो माँ ही होती है| तब मोबाइल नहीं था नहीं फोन की सुविधा उपलब्ध थी | आग्रह करतीं थीं कम से कम माह में एक पत्र लिखने का परंतु कहाँ सुनती थी मैं काम की व्यस्तता का हवाला देकर अपने को भारमुक्त कर लेती थी| दिन पंख लगा कर उड़ गए माँ भी महाप्रयाण को चलीं गयीं|अब तो पत्र ही एक मात्र सहारा है जो माँ ने लिखा था |काश माँ की बात मान लेती तो आज और अधिक जानकारी होती जिससे जिदंगी का सफर आसान हो जाता |

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माँ की सीख🙏🙏 माँ हमेशा सिखाया करतीं थीं. जीवन में कभी भी बेकार मत बैठे रहना क्योंकि बैठे बैठे व्यक्ति👤 सोने की दीवार खा जाता है🤗 मतलब धनी व्यक्ति भी अगर कोई उद्यम नहीं करता है और विरासत में मिली संपत्ति का उपभोग करते रहता है तो वह कंगाल हो जाता है | वहअपने बच्चों👧👦 के लिए कुछ भी नहीं छोड़कर जाएगा | इसलिए विरासत में मिली संपत्ति को अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने तथा परिवार👨👦👧👩👴👵 के लिए रोटी स्वयं उपार्जन करना चाहिए | कितने अमूल्य विचारों को आपने सहज ही समझा दिया माँ..🙏🙏🙏