माँ कहा करतीं थीं पहले , क तब ख. अर्थात पहले कर्म करो तब खाना खाओ | नहीं समझ में आती थी माँ की गुढ़ बातें बचपन में जब उम्र बढी तब समझ में आया कितना आसानी से हम सभी बच्चों के दिमाग में वो 🌰बीज बो रहीं थीं जिसके फलों का स्वाद जीवन भर मिलने वाला था| सुबह जगने से लेकर रात सोने 😴 तक अपने ज्ञानवर्धक बातों से सींचती रहतीं थी हमलोगो को| ये कोई अलग बात नहीं लगता था उस समय क्योंकि हमलोग दुनिया की सच्चाई से अनजान थे| परंतु अब जीवन समर में माँ की बातें राह दिखाती है बल प्रदान करती है सच की रास्तों पर टिके रहने के लिए| शायद हम सभी को सुरक्षित करने का सबसे कामयाब तरीका अपनाया था माँ ने जिसमें शत प्रतिशत सफलता🏆ही था |और आज भी हमलोग उसी वरदान का सुख भोग रहे हैं जिसकी तपस्या माँ ने की थीं| कोटि कोटि नमन माँ 🙏🙏🙏 हर जन्म में आप की ही ममत्व की छांव मिले......

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

फलसफा जिंदगी का

भारतीय🇮🇳👳 संस्कृति में कोरोना से बचाव के उपाय

माँ की सीख🙏🙏 माँ हमेशा सिखाया करतीं थीं. जीवन में कभी भी बेकार मत बैठे रहना क्योंकि बैठे बैठे व्यक्ति👤 सोने की दीवार खा जाता है🤗 मतलब धनी व्यक्ति भी अगर कोई उद्यम नहीं करता है और विरासत में मिली संपत्ति का उपभोग करते रहता है तो वह कंगाल हो जाता है | वहअपने बच्चों👧👦 के लिए कुछ भी नहीं छोड़कर जाएगा | इसलिए विरासत में मिली संपत्ति को अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने तथा परिवार👨👦👧👩👴👵 के लिए रोटी स्वयं उपार्जन करना चाहिए | कितने अमूल्य विचारों को आपने सहज ही समझा दिया माँ..🙏🙏🙏