माँ की सोच 🙏🙏 बाबुजी के साथ आपकी सोच कइ मुद्दे परअलग 👈😑👉थी | आप को रोटी पसंद थी बाबुजी को भात . आप हरी सब्जी खानापसंद करतीं थीं बाबुजी को आलू के बिना भोजन अधूरा लगता था |परंतु जब बात बच्चों की आ जाए तब आप दोनों की सोच एक रहती थी | बेहतरीन दांपत्य जीवन था आप दोनों का. कहाँ मतभेद प्रकट करनी है और कहाँ सामंजस्य बिठाना है बखूबी निभाती थीं आप| बहुत ही समरसता के साथ हमलोगों की परवरिश की आप दोनों ने | बाबुजी ने गलत बातों का विरोध करने का आत्मबल जगाया वही आपने सच्चाई की जीत का विश्वास 💜❤ दिलाई | संवेदनशीलता का पाठ आप ने पढ़ाया भावनाओं पर विजय प्राप्त करने की सीख बाबुजी ने दी | जब भी कहीं हमारे व्यक्तित्व की प्रशंसा होती है आपलोग बेसाख्ता याद आतें हैं | सब कुछ सिखाया आप ने अपने बिना जीना नहीं सिखाया माँ....

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माँ की सीख🙏🙏 माँ हमेशा सिखाया करतीं थीं. जीवन में कभी भी बेकार मत बैठे रहना क्योंकि बैठे बैठे व्यक्ति👤 सोने की दीवार खा जाता है🤗 मतलब धनी व्यक्ति भी अगर कोई उद्यम नहीं करता है और विरासत में मिली संपत्ति का उपभोग करते रहता है तो वह कंगाल हो जाता है | वहअपने बच्चों👧👦 के लिए कुछ भी नहीं छोड़कर जाएगा | इसलिए विरासत में मिली संपत्ति को अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने तथा परिवार👨👦👧👩👴👵 के लिए रोटी स्वयं उपार्जन करना चाहिए | कितने अमूल्य विचारों को आपने सहज ही समझा दिया माँ..🙏🙏🙏