माँ के वचन 🙏🙏माँ कहा करतीं थीं जिसका धन जाता है उसका धर्म भी चला जाता है अर्थात जब किसी व्यक्ति का कुछ चोरी होता है तब वह निर्दोष व्यक्ति को भी शक के निगाह से देखने🎑 लगता है क्योंकि उसे तो पता नहीं होता कि चोरी किसने की और वह व्यक्ति निरपराधी को भी अपराधी मानने का पाप कर देता है | इसी के साथ माँ कहतीं थीं कि व्यक्ति का मानसिक स्थिति भी इस कदर असंतुलित हो जाता है कि थाली खोने पर गगरी में हाथ डाल कर थाली को खोजता है मतलब असंभव जगह भी प्रयास करता है अपना खोई हुई चीज को तलाशने का | कितना सटीक विश्लेषण करतीं थीं रोजमर्रा के जीवन का साथ ही साथ हमलोगो को शिक्षित भी करतीं रहतीं थीं अपने सहज एवं सरल तरीके से | आज भी आप के द्वारा सिखाई गई बातें जीवन की कठिनाइयों को दूर करती रहती है एवं मुश्किल घड़ी में भी सकारात्मक व्यवहार के साथ लड़ने तथा जीतने का आत्मबल प्रदान करतीं हैं माँ 🙏🙏🙏

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माँ की सीख🙏🙏 माँ हमेशा सिखाया करतीं थीं. जीवन में कभी भी बेकार मत बैठे रहना क्योंकि बैठे बैठे व्यक्ति👤 सोने की दीवार खा जाता है🤗 मतलब धनी व्यक्ति भी अगर कोई उद्यम नहीं करता है और विरासत में मिली संपत्ति का उपभोग करते रहता है तो वह कंगाल हो जाता है | वहअपने बच्चों👧👦 के लिए कुछ भी नहीं छोड़कर जाएगा | इसलिए विरासत में मिली संपत्ति को अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने तथा परिवार👨👦👧👩👴👵 के लिए रोटी स्वयं उपार्जन करना चाहिए | कितने अमूल्य विचारों को आपने सहज ही समझा दिया माँ..🙏🙏🙏