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फलसफा जिंदगी का

किसी के लिए जिंदगी के मायने क्या हो सकता है यह व्यक्ति🚶 के सोच पर निर्भर करता है  | एक समय रहता है जब  माँ -बाप के लिए  बच्चे पुरी दुनिया होने का अहसास कराते हैं  वहीं बच्चों की पुरी दुनिया भी माँ बाप तक सीमित रहती है | फिर बच्चे👶👶 बडे़ होते हैं  उनका संसार व्यापक होता जाता है  |समय के साथ प्राथमिकता बदलती जाती है |बच्चों के भी अपने 👶👶बच्चें होते हैं |इधर माँ बाप की दुनिया, पुरी तरह से बच्चे और उसके बच्चों तक सिमट सी जाती है | फिर एक समय ऐसा आता है जब जिनकी दुनिया हम होते हैं और जो हमारे लिए पुरी दुनिया बनाते हैं वही हमें छोड़ कर चले जाते हैं अथवा उन्हें जाना पड़ता है   समझ में नहीं आता है कि जिदंगी के मायने क्या ❓ हैं  कहाँ से हमलोग आए हैं और कहाँ जाना है अजीब सी अबूझ पहेली में दिमाग उलझा रहता है  | माँ -बाबुजी का परलोक गमन जीवन का वह "पाठ" पढा गया जिसकी कल्पना मात्र से ही कभी सिहर जाते थे | अब तो इस मायावी दुनिया से ज्यादा इसकी नश्वरता में विश्वास हो चला है | अब नतो कोई बात कडवी लगती है और न ही किसी की बातें आकर्षित करती है | एक ह...

पचास साल के बाद की दिनचर्या

प्रिय दोस्तों👭👬👫 आज मैं  उन लोगो के बारे में कुछ बातें लिखना चाहती हूँ जो लोग अपने जीवन में पचास बसंत देख चुके हैं  . सबसे पहले तो आपलोग खुश 😄😃 हो जाइये कि आपने अर्धशतक पुरा कर लिया  . भारतीय संस्कृति में शतायु पुरा करने की स्थिति को आदर्श जीवन काल माना गया है  जो कि अब कम लोग ही  पुरा कर पाते हैं  . पचास साल पुरा कर लेने के बाद व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं   अब ये बात समझ लेना चाहिए कि जीवन का अधिकांश समय भागदौड़ में बीत गया  और अब ठहरकर अपने बारे में सोचने की आवश्यकता है. अपने स्वास्थ्य के लिए सोचना चाहिए 1. जहाँ तक संभव हो सके  जल्दी सोने और  सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ देना चाहिए 2.  योग एवं व्यायाम को अपने दैनिक जीवन में अनिवार्य रूप से शामिल कर लेना चाहिए 3. अपने किसी एक हाॅवी को विकसित कर लेना चाहिए .  4 . हो सके तो अपने आस पास के किसी बाग बगीचे मे थोड़ा समय व्यतीत करने की आदत डाल लेना चाहिए ताकि आप प्रकृति🌿🍃 के सानिध्य में कुछ समय बिता सके.  5. वैसे ...

Health is wealth प्रिय दोस्तों👭👬👫 आज मैं एक ऐसे महामारी या बीमारी के बारे में लिखने जा रहीं हूँ जिस पर पहले ही काफी कुछ लिखा जा चुका है . लेकिन मेरा मन नहीं माना मुझे लगता है कि कोविड 19 या कोरोना वायरस के बारे में जितना भी चर्चा की जाएगी वह समीचीन होगा . इस का कारण है कि अब हमलोगो को कोरोना के साथ जीने की आदत डालने की आवश्यकता है . अगर मानसिक रूप से मज़बूत रहेगें तभी इस को हरा पाएंगे . इस बीमारी से अबतक कितना नुकसान हुआ है उसका आकलन कर पाना मुश्किल है.इस बीमारी के दीर्घकालिक नुकसान अवश्य ही हो ना है जैसा कि अन्य महामारी के समय होता है . फिलहाल इस बीमारी ने विकसित देश और विकासशील देश के बीच का फर्क समाप्त कर दिया है . युरोपीय देश हो या अमेरिका🇺🇸 जैसा विकसित देश सारी स्वास्थ्य सुविधाएं कम पड़ गया और लोग काल के गाल में समाते चले गए और शीर्ष नेतृत्व शोक प्रकट करने के सिवा कुछ भी नहीं कर सका . दो तीन बातें इस महामारी के वक्त स्पष्ट हुआ है जो पूरी दुनिया के आखें खोल देने में सक्षम है पहली ये कि पुरा विश्व🌏 एक अदृश्य शक्ति के समक्ष घुटने टेकने को मजबूर हो गया .दूसरी ये कि माल्थस (अर्थशास्त्री) का सिद्धांत भी सत्य साबित हो रहा है कि प्रकृति स्वयं जनसंख्या नियंत्रण करती है . पृथ्वी पर पर उतनी ही जनसंख्या रहेगा जितना प्रकृति चाहेगी . तीसरी और सबसे अहम बात ये कि मानव जाति को लघुता का अहसास इस बीमारी ने करवा दिया . कोई एक सर्वोच्च सत्ता है जो इस पुरे ब्रह्मांड को संचालित कर रहा है भले ही हम उसे माने या न माने अथवा किसी भी रूप में उपासना करें .

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Health is wealth स्वास्थ्य ही धन है. आज पुरे विश्व का एक कटु सत्य है कि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी समस्याओं का सामना कर रहा है. वर्तमान समय में कोरोना महामारी ने पुरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. ऐसे समय में एक स्वभाविक प्रश्न दिमाग में आता है कि मानव जाति के लिए कौन सी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे इस प्रकार के महामारी का डटकर मुकाबला किया जा सकता है... जाहिर सी बात है व्यक्ति का शरीर अगर अन्दर से मज़बूत है स्वस्थ है तभी उस पर कीटाणु जीवाणु या विषाणु का कोई असर नहीं होगा . इस लिए कोरोना से 102 साल की महिला भी स्वस्थ हो सकी. तात्पर्य यह कि व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का ध्यान हमेशा रखना है. वर्तमान परिदृश्य में थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है. भारतीय संस्कृति में स्वच्छता के प्रति हमेशा से सजगता रही है . न सिर्फ इस कोरोना महामारी से बल्कि किसी भी बीमारी से बचाव में स्वच्छता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है . स्वस्थ जीवन जीने के लिए खान पान के साथ एक अनुशासित दिनचर्या भी आवश्यक शर्त है . समय पर सोना समय से जागना एवं योग तथा व्यायाम को अपने दैनिक जीवन में शामिल कर व्यक्ति अपने आप को स्वस्थ रख सकता है . अगर कोई स्वस्थ जीवन जी रहा है मतलब उनके पास और ढेर सारे काम करने की आज़ादी के साथ साथ बीमारी पर खर्च होने वाले आर्थिक नुकसान से बचत भी भरपूर होना है . स्वस्थ व्यक्ति मानसिक रूप से भी मजबूत स्थिति में रहता है . इस प्रकार वो अपने परिवार के साथ ही समाज तथा राष्ट्र के विकास में भरपुर योगदान करता है .

भारतीय संस्कृति में दस प्रकार के सुख की बात कही गई है जिसके अनुसार - प्रथम सुख सुन्दर हो काया दूजा सुख घर में हो माया..... और भी आगे है जिसकी चर्चा आगे के भाग में होगी | सर्व प्रथम यहाँ व्यक्ति के सुन्दर काया यानि कि स्वस्थ एवं निरोगी शरीर के बारे में कहा गया है. जो व्यक्ति स्वस्थ शरीर का मालिक है वही व्यक्ति दूनिया मे सबसे सुखी प्राणी है | अगर आप स्वस्थ हैं तभी आप संसार के अन्य सुखों के उपभोग करने लायक रहेंगे | जीवन के आपाधापी में व्यक्ति अपने शरीर के प्रति लापरवाही बरतता है इसके कारण दिनोंदिन व्यक्ति का शरीर अस्वस्थ होता जाता है | फिर एक दिन ऐसा आता है कि लाख उपाय करने के बावजूद व्यक्ति अपने पूर्ववत् अवस्था में नहीं पहुंच पाता है | एक कहावत भी है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है |कहने का तात्पर्य है कि हम सभी की ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि अपने आप को स्वस्थ रखने के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाय |

स्वस्थ  जीवन जीने के लिए  निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अति आवश्यक है | 1. खान- पान  हमारे दैनिक जीवन के भोजन पर हमारा स्वास्थ्य निर्भर करता है  |  रोजमर्रा के  जीवन में हमे सात्विक आहार ही लेना चाहिए |  शाकाहारी भोजन मानव के लिए सर्वोत्तम भोजन  है |  शाकाहारी  भोजन   हमें कई बीमारी से दुर रखता है 2.  मौसम के अनुसार भोजन -व्यक्ति को मौसम के अनुसार ही भोजन करना चाहिए| क्या आपको पता है  कि भोजन के तौर तरीके से न सिर्फ हमारा   शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी निर्धारित होता है  | पौष्टिक भोजन व्यक्ति के विकास की पहली एवं  अनिवार्य शर्त है |ऐसे भी कहा गया है कि पेट की आग सबसे भंयकर आग 🔥 होती है जब जठराग्नि प्रज्ज्वलित   होती है तो इंसान नैतिक अनैतिक का भेद भूल जाता है| 3  . आयु के  अनुसार भोजन  -  हर आयु वर्ग के लिए अलग अलग प्रकार के भोजन का वर्णन भारतीय संस्कृति में  है जो आज भी  प्रासंगिक है | बच्चे को वैसे भोजन देना आवश्यक एवं उचित होगा जो उनके शा...

माँ की दिनचर्या🙏🙏 मेरी माँ अलसुबह ठीक चार बजे उठ जातीं थीं | नित्य क्रिया के बाद "भये प्रगट कृपाला दीन दयाला, कौशल्या हितकारी... " भजन गाकर हमलोग को उठाया करतीं थीं | आज भी जब ये भजन पढती या सुनती हूँ तो अपने बचपन के दिनों में खो जाती हूँ | उसके बाद माँ हमलोग को पढ़ने के लिए बैठा देतीं थीं और स्वयं गृह कार्य में जुट जातीं थीं क्योंकि उन्हें विद्यालय जाना होता था |प्रधानाध्यापिका होने के नाते विद्यालय में भी काफी जिम्मेवारी थीं माँ की और वो अपने हर कार्य को अनुशासन के साथ करतीं थीं | इसीलिए हमलोगों को भी अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा हमेशा देतीं रहीं | मितव्ययी थीं लेकिन कंजुस नहीं इसलिए कभी आर्थिक मुसीबत नही आई |जीवन का जो भी पाठ रहा हो दूसरों को पढाने से पहले स्वयं उस को अपने उपर लागू करतीं थीं |विद्यालय से आने के बाद घर🏡 में छूटे हुए कार्यो को पुरा करतीं थीं |माँ का प्रयास रहता था कि भोजन स्वयं बनाए. सच में माँ के हाथों बने भोजन का स्वाद तो अविस्मरणीय है |आठ से नौ बजे तक रात्रि विश्राम करने को मजबूर हो जाती थीं क्योंकि सुबह उठने के बाद कभी भी एक मिनट का फुर्सत नहीं मिलता था माँ को |हर समय काम में व्यस्त रहने के कारण इतना थक जाती थीं कि कहीं भी कैसे भी नींद आ जाती माँ को... 🙏🙏🙏

माँ के आदर्श 🙏🙏 " सादा जीवन उच्च विचार " माँ ने इस सूत्र वाक्य को अपने जीवन में आत्मसात कर लिया था एवं हमलोग को भी इसी तरह से जीवन व्यतीत करने की शिक्षा देते रहतीं थीं | काफी धन संपत्ति की स्वामिनी होने के बावजूद भी बहुत ही साधारण तरीके से जीवन यापन करतीं थीं| | दिखावा बिल्कुल ही नहीं पसंद था आप को न ही आडंबर में विश्वास था आप का |जितना संभव हो सकता था जरूरमंद व्यक्ति के सहायता के लिए तत्पर रहतीं थीं आप | हमेशा आप कहतीं थीं कि दायाँ हाथ द्वारा दिया गया दान बाएँ हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए | वात्सल्य भाव ऐसा कि आप के नजर में हरेक बच्चा आप को अपने संतान जितना ही प्यारा लगता था | हमलोग कभी कभी आप के इस व्यवहार पर चिढ़ जाते थे तब आप बडे़ प्यार से समझाती थीं कि बालरूप में भगवान बसते हैं इसलिए बच्चों में भेद भाव उचित नहीं है | इतना विराट भाव की स्वामिनी थीं आप माँ... 🙏🙏🙏