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भारतीय🇮🇳👳 संस्कृति में कोरोना से बचाव के उपाय

प्रिय दोस्तों👭👬👫 आज फिर से मुझे कोरोना जैसे महामारी पर कुछ लिखने का मन कर रहा है क्योंकि अभी भी इसका खतरा टला नहीं है  .  कोरोना से बचाव में भारतीय संस्कृति की अहम भूमिका रही है.  जैसा कि हम सभी को मालूम है और ये सारी बातें हमलोग को कहीं न कही बचपन से पता भी है  . ये अलग बात है कि हम सब अपने परंपरा गत आदतों को छोड़ते जा रहे थे   आज वही सब  आदतों को फिर से अपने जीवन में शामिल करने की आवश्यकता आन पड़ी है  .  अभिवादन करने का तरीका   अब तो ये सिद्ध हो गया कि अभिवादन करने की भारतीय परंपरा ही सर्वश्रेष्ठ है. दोनों हाथों को जोडकर नमस्ते👋 करने की परंपरा का कोई जवाब नहीं.  भारतीय संस्कृति में हर कोई को चूमने और   हर व्यक्ति को  गले लगाने की प्रथा नहीं रही है खासकर बडे़ हो जाने के बाद  . नमस्ते वाला अभिवादन अब विश्वव्यापी 🌍 हो चला है  . कोरोना से बचाव के लिए शारीरिक दूरी है बहुत जरूरी  .   स्वच्छता वाली आदत -    रखे सही सलामत           भारतीय परंपरा में ...

crazy family

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लुप्तप्राय प्रथाएं

 हमलोग अपने जीवन में अपने समाज में कितने ही प्रथाएं खोते जा रहे हैं इसका अंदाजा भी नहीं है  . कहीं ऐसा न हो कि आने वाली पीढ़ी को बहुत समझाने के बाद भी हमलोग  उनलोगों को अपने भूले बिसरे चीजों से अवगत कराने में असमर्थ हो जाए   यह एक प्रकार का वैसा ही संकटग्रस्त सामाजिक कल है जैसे संकटग्रस्त वन्य जीव प्राणी आज है. ये आज की पीढ़ी की सामाजिक जिम्मेदारी बनती है कि वो अपनी प्रथाओं को सहेजकर रखे और उसे आने वाली पीढ़ी को वैसे ही  सौंपें जैसा उन्हें विरासत में मिली. ऐसी ही एक संकटग्रस्त प्रथा है सामूहिक भोज में परोसकर खिलाने की परंपरा.  आजकल किसी भी प्रकार के आयोजन हो खाना परोसकर खिलाने के बजाय स्वयं सेवा आधारित हो गया है. मेजबान द्वारा खाने का मनुहार नहीं पूछा जाता है कि खाना खाया कि नहीं मेहमान लोग भी खाने पर ऐसे टुट पड़ते हैं  जैसे खाना मिलेगा ही नहीं . दिखावे के चक्कर में छप्पन प्रकार के व्यंजन की व्यवस्था की जाती है लेकिन भोजन में न तो स्वाद रहता है और न ही जूठे का ख्याल रखा जाता है लोग खाना खाते रहते हैं और उसी जूठे हाथ से दोबारा खाना लेने स्टाल पर पह...

समझ जिंदगी की

जिंदगी के आपाधापी के साथ हम कब इतने बड़े हो गए कि  विचारों में व्यवहार में परिपक्वता आ गई. नादानियां अपना पल्ला छुड़ाकर कबका मैदान छोड़ गईं. जिंदगी के समर में सबके अपने चुनौती होती है परन्तु जबतक आप किसी बड़ी चुनौती को नजदीक से नहीं देखते तबतक आप को अपना संघर्ष पहाड़ सरीखा महसूस होता है इसलिए आवश्यक है कि आप अपनी दूनिया से बाहर निकले और  देखें महसूस करें  कि संसार में सच्चाई कल्पना से परे है संघर्ष इतना ज्यादा है कि मानवता  दांव पर लगी हुई है  जिसके पास खाने को है उसे भुख नहीं और जो भूखा है उसके पास खाना नहीं.  किस अंधी दौड़ में मानव शामिल हो गया है उसने मानवता को ही दांव पर लगा दिया....  क्या ठहरकर सोचने का वक्त नहीं आ गया है  या फिर इतनी भी सोचने की शक्ति नहीं बची है. मानव समुदाय निरर्थक एक दूसरे के को खत्म करने में लगा है जबकि वह भी इस संसार का अस्थायी मेहमान ही है  .  किस तरह के संसार में जी रहे हैं लोग जहाँ बच्चों को भी नहीं बख्श रहे हैं  . और कितना नीचे गिरेगा इंसान  क्यों नहीं इस तरह के नीच प्राणियों को भगवान सबक सिखाते ...

रक्षाबन्धन त्योहार 2020

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रक्षाबन्धन का त्यौहार 2020 भारत त्यौहारों का देश है |भारतीय संस्कृति में सात वार  नौ त्योहार वाली कहावत चरितार्थ होती है यानि सात दिन के सप्ताह में नौ त्योहार मनाने की परंपरा चली आ रही है  |श्रावण पूर्णिमा के दिन भारतीय संस्कृति में रक्षाबन्धन  के रूप मेंेे मनाने की परंपरा है | इस बार अन्य त्योहार की तरह रक्षाबन्धन त्योहार पर भी कोरोना  का ग्रहण  लगा रहेगा | परंतु हमलोगो को सावधानी बरतते हुए अपने परंपरा को निभाने का सार्थक प्रयास करना चाहिए | रक्षाबन्धन 2020 का शुभ मुहूर्त  -3 अगस्त  दिन सोमवार को पूर्वान्ह  9:14  बजे से रात्रि 9:17  बजे तक | रक्षाबन्धन  का त्यौहार मनाने के पीछे कुछ पौराणिक कथाओं का महत्वपूर्ण स्थान है .कहा जाता  हैं कि  एक बार     श्री कृष्ण  भगवान की कलाई पर  चोट लग गई थी तब  द्ौपदी ने साङी  का आंचल फाङकर  कलाई पर बांध दी  श्रीकृष्ण भगवान ने  मुस्कुराते हुए जीवन भर रक्षा करने का वादा किया  जिसें उन्होने निभाया भी . रक्षाबंधन  का त्यौ...

भारतीय🇮🇳👳 संस्कृति

भारतीय संस्कृति में हर मौसम🌍☀⛅☁💧⚡❄ को अलग एवं महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है |जैसे अभी बरसात  के मौसम को भारत में एक उत्सव की तरह मनाने की परंपरा है |भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है जिसमें कृषिकार्यो को भी आनंदमय तरीके से संपन्न किये जाने की परंपरा थी   बरसात के मौसम में  धान रोपण का प्रमुख कार्य होता है | और भी रबी फसल रोपे जाते हैं लेकिन व्यापक क्षेत्र में धान की फसल ही लगायी जाती है| मुझे याद है आज से तीस पैंतीस वर्ष पूर्व में धान की पहली रोपण के अवसर पर जिसे  बिहार में  पहरोपा कहा जाता है केे अवसर पर विशेष रूप से खाना बनाने और   खिलाने की परंंपरा थी  पता नहीं अब लोग इसे कैसे मनाते हैं  |बरसात के मौसम में एक और प्रचलन बिहार में है चना का दाल भरकर पूड़ी जिसे दलपुडी  कहा  जााता हैऔर खीर पकाकर खाते हैं  इसे अदरिया कहते हैं क्योंकि आद्रा नक्षत्र में  विशेष रूप से इस प्रकार के भोजन बनाने और खिलाने की परंपरा है|  बरसात के मौसम में पकौड़े के साथ चाय का अलग ही मजा है | सावन का महीना भगवान शिव जी का  महीना है हर सा...

फलसफा जिंदगी का

किसी के लिए जिंदगी के मायने क्या हो सकता है यह व्यक्ति🚶 के सोच पर निर्भर करता है  | एक समय रहता है जब  माँ -बाप के लिए  बच्चे पुरी दुनिया होने का अहसास कराते हैं  वहीं बच्चों की पुरी दुनिया भी माँ बाप तक सीमित रहती है | फिर बच्चे👶👶 बडे़ होते हैं  उनका संसार व्यापक होता जाता है  |समय के साथ प्राथमिकता बदलती जाती है |बच्चों के भी अपने 👶👶बच्चें होते हैं |इधर माँ बाप की दुनिया, पुरी तरह से बच्चे और उसके बच्चों तक सिमट सी जाती है | फिर एक समय ऐसा आता है जब जिनकी दुनिया हम होते हैं और जो हमारे लिए पुरी दुनिया बनाते हैं वही हमें छोड़ कर चले जाते हैं अथवा उन्हें जाना पड़ता है   समझ में नहीं आता है कि जिदंगी के मायने क्या ❓ हैं  कहाँ से हमलोग आए हैं और कहाँ जाना है अजीब सी अबूझ पहेली में दिमाग उलझा रहता है  | माँ -बाबुजी का परलोक गमन जीवन का वह "पाठ" पढा गया जिसकी कल्पना मात्र से ही कभी सिहर जाते थे | अब तो इस मायावी दुनिया से ज्यादा इसकी नश्वरता में विश्वास हो चला है | अब नतो कोई बात कडवी लगती है और न ही किसी की बातें आकर्षित करती है | एक ह...

पचास साल के बाद की दिनचर्या

प्रिय दोस्तों👭👬👫 आज मैं  उन लोगो के बारे में कुछ बातें लिखना चाहती हूँ जो लोग अपने जीवन में पचास बसंत देख चुके हैं  . सबसे पहले तो आपलोग खुश 😄😃 हो जाइये कि आपने अर्धशतक पुरा कर लिया  . भारतीय संस्कृति में शतायु पुरा करने की स्थिति को आदर्श जीवन काल माना गया है  जो कि अब कम लोग ही  पुरा कर पाते हैं  . पचास साल पुरा कर लेने के बाद व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं   अब ये बात समझ लेना चाहिए कि जीवन का अधिकांश समय भागदौड़ में बीत गया  और अब ठहरकर अपने बारे में सोचने की आवश्यकता है. अपने स्वास्थ्य के लिए सोचना चाहिए 1. जहाँ तक संभव हो सके  जल्दी सोने और  सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ देना चाहिए 2.  योग एवं व्यायाम को अपने दैनिक जीवन में अनिवार्य रूप से शामिल कर लेना चाहिए 3. अपने किसी एक हाॅवी को विकसित कर लेना चाहिए .  4 . हो सके तो अपने आस पास के किसी बाग बगीचे मे थोड़ा समय व्यतीत करने की आदत डाल लेना चाहिए ताकि आप प्रकृति🌿🍃 के सानिध्य में कुछ समय बिता सके.  5. वैसे ...

Health is wealth प्रिय दोस्तों👭👬👫 आज मैं एक ऐसे महामारी या बीमारी के बारे में लिखने जा रहीं हूँ जिस पर पहले ही काफी कुछ लिखा जा चुका है . लेकिन मेरा मन नहीं माना मुझे लगता है कि कोविड 19 या कोरोना वायरस के बारे में जितना भी चर्चा की जाएगी वह समीचीन होगा . इस का कारण है कि अब हमलोगो को कोरोना के साथ जीने की आदत डालने की आवश्यकता है . अगर मानसिक रूप से मज़बूत रहेगें तभी इस को हरा पाएंगे . इस बीमारी से अबतक कितना नुकसान हुआ है उसका आकलन कर पाना मुश्किल है.इस बीमारी के दीर्घकालिक नुकसान अवश्य ही हो ना है जैसा कि अन्य महामारी के समय होता है . फिलहाल इस बीमारी ने विकसित देश और विकासशील देश के बीच का फर्क समाप्त कर दिया है . युरोपीय देश हो या अमेरिका🇺🇸 जैसा विकसित देश सारी स्वास्थ्य सुविधाएं कम पड़ गया और लोग काल के गाल में समाते चले गए और शीर्ष नेतृत्व शोक प्रकट करने के सिवा कुछ भी नहीं कर सका . दो तीन बातें इस महामारी के वक्त स्पष्ट हुआ है जो पूरी दुनिया के आखें खोल देने में सक्षम है पहली ये कि पुरा विश्व🌏 एक अदृश्य शक्ति के समक्ष घुटने टेकने को मजबूर हो गया .दूसरी ये कि माल्थस (अर्थशास्त्री) का सिद्धांत भी सत्य साबित हो रहा है कि प्रकृति स्वयं जनसंख्या नियंत्रण करती है . पृथ्वी पर पर उतनी ही जनसंख्या रहेगा जितना प्रकृति चाहेगी . तीसरी और सबसे अहम बात ये कि मानव जाति को लघुता का अहसास इस बीमारी ने करवा दिया . कोई एक सर्वोच्च सत्ता है जो इस पुरे ब्रह्मांड को संचालित कर रहा है भले ही हम उसे माने या न माने अथवा किसी भी रूप में उपासना करें .

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Health is wealth स्वास्थ्य ही धन है. आज पुरे विश्व का एक कटु सत्य है कि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी समस्याओं का सामना कर रहा है. वर्तमान समय में कोरोना महामारी ने पुरी दुनिया को हिला कर रख दिया है. ऐसे समय में एक स्वभाविक प्रश्न दिमाग में आता है कि मानव जाति के लिए कौन सी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे इस प्रकार के महामारी का डटकर मुकाबला किया जा सकता है... जाहिर सी बात है व्यक्ति का शरीर अगर अन्दर से मज़बूत है स्वस्थ है तभी उस पर कीटाणु जीवाणु या विषाणु का कोई असर नहीं होगा . इस लिए कोरोना से 102 साल की महिला भी स्वस्थ हो सकी. तात्पर्य यह कि व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का ध्यान हमेशा रखना है. वर्तमान परिदृश्य में थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है. भारतीय संस्कृति में स्वच्छता के प्रति हमेशा से सजगता रही है . न सिर्फ इस कोरोना महामारी से बल्कि किसी भी बीमारी से बचाव में स्वच्छता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है . स्वस्थ जीवन जीने के लिए खान पान के साथ एक अनुशासित दिनचर्या भी आवश्यक शर्त है . समय पर सोना समय से जागना एवं योग तथा व्यायाम को अपने दैनिक जीवन में शामिल कर व्यक्ति अपने आप को स्वस्थ रख सकता है . अगर कोई स्वस्थ जीवन जी रहा है मतलब उनके पास और ढेर सारे काम करने की आज़ादी के साथ साथ बीमारी पर खर्च होने वाले आर्थिक नुकसान से बचत भी भरपूर होना है . स्वस्थ व्यक्ति मानसिक रूप से भी मजबूत स्थिति में रहता है . इस प्रकार वो अपने परिवार के साथ ही समाज तथा राष्ट्र के विकास में भरपुर योगदान करता है .

भारतीय संस्कृति में दस प्रकार के सुख की बात कही गई है जिसके अनुसार - प्रथम सुख सुन्दर हो काया दूजा सुख घर में हो माया..... और भी आगे है जिसकी चर्चा आगे के भाग में होगी | सर्व प्रथम यहाँ व्यक्ति के सुन्दर काया यानि कि स्वस्थ एवं निरोगी शरीर के बारे में कहा गया है. जो व्यक्ति स्वस्थ शरीर का मालिक है वही व्यक्ति दूनिया मे सबसे सुखी प्राणी है | अगर आप स्वस्थ हैं तभी आप संसार के अन्य सुखों के उपभोग करने लायक रहेंगे | जीवन के आपाधापी में व्यक्ति अपने शरीर के प्रति लापरवाही बरतता है इसके कारण दिनोंदिन व्यक्ति का शरीर अस्वस्थ होता जाता है | फिर एक दिन ऐसा आता है कि लाख उपाय करने के बावजूद व्यक्ति अपने पूर्ववत् अवस्था में नहीं पहुंच पाता है | एक कहावत भी है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है |कहने का तात्पर्य है कि हम सभी की ये नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि अपने आप को स्वस्थ रखने के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाय |

स्वस्थ  जीवन जीने के लिए  निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना अति आवश्यक है | 1. खान- पान  हमारे दैनिक जीवन के भोजन पर हमारा स्वास्थ्य निर्भर करता है  |  रोजमर्रा के  जीवन में हमे सात्विक आहार ही लेना चाहिए |  शाकाहारी भोजन मानव के लिए सर्वोत्तम भोजन  है |  शाकाहारी  भोजन   हमें कई बीमारी से दुर रखता है 2.  मौसम के अनुसार भोजन -व्यक्ति को मौसम के अनुसार ही भोजन करना चाहिए| क्या आपको पता है  कि भोजन के तौर तरीके से न सिर्फ हमारा   शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी निर्धारित होता है  | पौष्टिक भोजन व्यक्ति के विकास की पहली एवं  अनिवार्य शर्त है |ऐसे भी कहा गया है कि पेट की आग सबसे भंयकर आग 🔥 होती है जब जठराग्नि प्रज्ज्वलित   होती है तो इंसान नैतिक अनैतिक का भेद भूल जाता है| 3  . आयु के  अनुसार भोजन  -  हर आयु वर्ग के लिए अलग अलग प्रकार के भोजन का वर्णन भारतीय संस्कृति में  है जो आज भी  प्रासंगिक है | बच्चे को वैसे भोजन देना आवश्यक एवं उचित होगा जो उनके शा...

माँ की दिनचर्या🙏🙏 मेरी माँ अलसुबह ठीक चार बजे उठ जातीं थीं | नित्य क्रिया के बाद "भये प्रगट कृपाला दीन दयाला, कौशल्या हितकारी... " भजन गाकर हमलोग को उठाया करतीं थीं | आज भी जब ये भजन पढती या सुनती हूँ तो अपने बचपन के दिनों में खो जाती हूँ | उसके बाद माँ हमलोग को पढ़ने के लिए बैठा देतीं थीं और स्वयं गृह कार्य में जुट जातीं थीं क्योंकि उन्हें विद्यालय जाना होता था |प्रधानाध्यापिका होने के नाते विद्यालय में भी काफी जिम्मेवारी थीं माँ की और वो अपने हर कार्य को अनुशासन के साथ करतीं थीं | इसीलिए हमलोगों को भी अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा हमेशा देतीं रहीं | मितव्ययी थीं लेकिन कंजुस नहीं इसलिए कभी आर्थिक मुसीबत नही आई |जीवन का जो भी पाठ रहा हो दूसरों को पढाने से पहले स्वयं उस को अपने उपर लागू करतीं थीं |विद्यालय से आने के बाद घर🏡 में छूटे हुए कार्यो को पुरा करतीं थीं |माँ का प्रयास रहता था कि भोजन स्वयं बनाए. सच में माँ के हाथों बने भोजन का स्वाद तो अविस्मरणीय है |आठ से नौ बजे तक रात्रि विश्राम करने को मजबूर हो जाती थीं क्योंकि सुबह उठने के बाद कभी भी एक मिनट का फुर्सत नहीं मिलता था माँ को |हर समय काम में व्यस्त रहने के कारण इतना थक जाती थीं कि कहीं भी कैसे भी नींद आ जाती माँ को... 🙏🙏🙏

माँ के आदर्श 🙏🙏 " सादा जीवन उच्च विचार " माँ ने इस सूत्र वाक्य को अपने जीवन में आत्मसात कर लिया था एवं हमलोग को भी इसी तरह से जीवन व्यतीत करने की शिक्षा देते रहतीं थीं | काफी धन संपत्ति की स्वामिनी होने के बावजूद भी बहुत ही साधारण तरीके से जीवन यापन करतीं थीं| | दिखावा बिल्कुल ही नहीं पसंद था आप को न ही आडंबर में विश्वास था आप का |जितना संभव हो सकता था जरूरमंद व्यक्ति के सहायता के लिए तत्पर रहतीं थीं आप | हमेशा आप कहतीं थीं कि दायाँ हाथ द्वारा दिया गया दान बाएँ हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए | वात्सल्य भाव ऐसा कि आप के नजर में हरेक बच्चा आप को अपने संतान जितना ही प्यारा लगता था | हमलोग कभी कभी आप के इस व्यवहार पर चिढ़ जाते थे तब आप बडे़ प्यार से समझाती थीं कि बालरूप में भगवान बसते हैं इसलिए बच्चों में भेद भाव उचित नहीं है | इतना विराट भाव की स्वामिनी थीं आप माँ... 🙏🙏🙏

माँ की सीख🙏🙏 माँ हमेशा सिखाया करतीं थीं. जीवन में कभी भी बेकार मत बैठे रहना क्योंकि बैठे बैठे व्यक्ति👤 सोने की दीवार खा जाता है🤗 मतलब धनी व्यक्ति भी अगर कोई उद्यम नहीं करता है और विरासत में मिली संपत्ति का उपभोग करते रहता है तो वह कंगाल हो जाता है | वहअपने बच्चों👧👦 के लिए कुछ भी नहीं छोड़कर जाएगा | इसलिए विरासत में मिली संपत्ति को अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए एवं अपने तथा परिवार👨👦👧👩👴👵 के लिए रोटी स्वयं उपार्जन करना चाहिए | कितने अमूल्य विचारों को आपने सहज ही समझा दिया माँ..🙏🙏🙏

माँ के वचन 🙏🙏माँ कहा करतीं थीं जिसका धन जाता है उसका धर्म भी चला जाता है अर्थात जब किसी व्यक्ति का कुछ चोरी होता है तब वह निर्दोष व्यक्ति को भी शक के निगाह से देखने🎑 लगता है क्योंकि उसे तो पता नहीं होता कि चोरी किसने की और वह व्यक्ति निरपराधी को भी अपराधी मानने का पाप कर देता है | इसी के साथ माँ कहतीं थीं कि व्यक्ति का मानसिक स्थिति भी इस कदर असंतुलित हो जाता है कि थाली खोने पर गगरी में हाथ डाल कर थाली को खोजता है मतलब असंभव जगह भी प्रयास करता है अपना खोई हुई चीज को तलाशने का | कितना सटीक विश्लेषण करतीं थीं रोजमर्रा के जीवन का साथ ही साथ हमलोगो को शिक्षित भी करतीं रहतीं थीं अपने सहज एवं सरल तरीके से | आज भी आप के द्वारा सिखाई गई बातें जीवन की कठिनाइयों को दूर करती रहती है एवं मुश्किल घड़ी में भी सकारात्मक व्यवहार के साथ लड़ने तथा जीतने का आत्मबल प्रदान करतीं हैं माँ 🙏🙏🙏

माँ की सोच 🙏🙏 बाबुजी के साथ आपकी सोच कइ मुद्दे परअलग 👈😑👉थी | आप को रोटी पसंद थी बाबुजी को भात . आप हरी सब्जी खानापसंद करतीं थीं बाबुजी को आलू के बिना भोजन अधूरा लगता था |परंतु जब बात बच्चों की आ जाए तब आप दोनों की सोच एक रहती थी | बेहतरीन दांपत्य जीवन था आप दोनों का. कहाँ मतभेद प्रकट करनी है और कहाँ सामंजस्य बिठाना है बखूबी निभाती थीं आप| बहुत ही समरसता के साथ हमलोगों की परवरिश की आप दोनों ने | बाबुजी ने गलत बातों का विरोध करने का आत्मबल जगाया वही आपने सच्चाई की जीत का विश्वास 💜❤ दिलाई | संवेदनशीलता का पाठ आप ने पढ़ाया भावनाओं पर विजय प्राप्त करने की सीख बाबुजी ने दी | जब भी कहीं हमारे व्यक्तित्व की प्रशंसा होती है आपलोग बेसाख्ता याद आतें हैं | सब कुछ सिखाया आप ने अपने बिना जीना नहीं सिखाया माँ....

माँ से की गई शिकायतें 🙏🙏🙏माँ से जब भी कभी खाने के बारे में या कभी किसी कपड़े की शिकायत करती थी तब बहुत ही धैर्य के साथ सारी बातों को सुनतीं थी| कभी किसी के साथ चिल्लाकर बात करने की आदत नहीं थीं उनकी. असीम धीरज था उनके पास इसी से कोई भी विपदा परास्त करने की क्षमता रखती थी माँ | हमलोग द्वारा बहुत परेशान किए जाने पर एक ही जबाब होता माँ के पास " जब स्वयं माँ बनोगी तब समझ में आएगा " बिल्कुल सही कहतीं थीं आप | माँ आपकी परेशानियों का अंदाज़ा लगा सकती हूँ |लेकिन अब क्या फायदा अब तो आप से माफी भी नहीं मांग सकती | हो सके तो बेवकूफी भरी नासमझी के लिए क्षमा कर दीजिएगा 🙏🙏🙏

माँ की बातें🙏🙏 आज शनिवार है. शनिवार के दिन जब बिना स्नान किए सुबह कुछ खाने को जिद करती थी तो माँ बहुत ही मनुहार के साथ मनाती पहले नहा धोकर हनुमान चालीसा पढ़ लो तभी खाना मिलेगा |अब तो शनिवार के दिन बिना पूजा किए पानी💧 भी नहीं पी पाती हूँ | पूजा करते वक्त आखें बरबस ही छलक आतीं है | माँ के दिए हुए संस्कार आज भी जीवन के अंधेरी सुरंग में मशाल🔦 की भांति कर्मपथ आलोकित करते हुए साहस प्रदान करता है | लगता ही नहीं है कि आप अब नहीं हैं जीवन के हर सांस में आपको पाती हूँ | क्या ऐसा संभव है कि एक इकाई अनेक में विभक्त होकर भी हर जगह पूर्णता के साथ उपस्थित हो 🌟🌟🌟आप वैसे ही अपनी⛔ दिव्यता के साथ हम सभी के साथ हैं माँ |

माँ कहा करतीं थीं पहले , क तब ख. अर्थात पहले कर्म करो तब खाना खाओ | नहीं समझ में आती थी माँ की गुढ़ बातें बचपन में जब उम्र बढी तब समझ में आया कितना आसानी से हम सभी बच्चों के दिमाग में वो 🌰बीज बो रहीं थीं जिसके फलों का स्वाद जीवन भर मिलने वाला था| सुबह जगने से लेकर रात सोने 😴 तक अपने ज्ञानवर्धक बातों से सींचती रहतीं थी हमलोगो को| ये कोई अलग बात नहीं लगता था उस समय क्योंकि हमलोग दुनिया की सच्चाई से अनजान थे| परंतु अब जीवन समर में माँ की बातें राह दिखाती है बल प्रदान करती है सच की रास्तों पर टिके रहने के लिए| शायद हम सभी को सुरक्षित करने का सबसे कामयाब तरीका अपनाया था माँ ने जिसमें शत प्रतिशत सफलता🏆ही था |और आज भी हमलोग उसी वरदान का सुख भोग रहे हैं जिसकी तपस्या माँ ने की थीं| कोटि कोटि नमन माँ 🙏🙏🙏 हर जन्म में आप की ही ममत्व की छांव मिले......

माँ की चिठ्ठी 🙏🙏 आज ही तो मिली जिसमें लिखा था " छोटु अब मुस्कुराने लगा होगा क्योंक आज पुरे तीन महीने का हो गया बिल्कुल सही बात थी पता नहीं कैसे उतने दुर से भी माँ को सब पता होता था बच्चों के मन की बात जान जातीं थी बिना कहे | माँ तो माँ ही होती है| तब मोबाइल नहीं था नहीं फोन की सुविधा उपलब्ध थी | आग्रह करतीं थीं कम से कम माह में एक पत्र लिखने का परंतु कहाँ सुनती थी मैं काम की व्यस्तता का हवाला देकर अपने को भारमुक्त कर लेती थी| दिन पंख लगा कर उड़ गए माँ भी महाप्रयाण को चलीं गयीं|अब तो पत्र ही एक मात्र सहारा है जो माँ ने लिखा था |काश माँ की बात मान लेती तो आज और अधिक जानकारी होती जिससे जिदंगी का सफर आसान हो जाता |